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साहित्यिक संगठन
अखिल भारतीय साहित्य परिषद् साहित्य के क्षेत्र में भारतीय दृष्टि को स्थापित करने, देश के बौध्दिक वातावरण को स्वस्थ बनाने, समस्त भारतीय भाषाओं एवं उनके साहित्य का संरक्षण करने तथा नवोदित साहित्यकारों को प्रोत्साहन देने हेतु कार्य करने वाली संस्था है | इस तरह साहित्य परिषद् अपने स्थापना काल सन् १९६६ से ही विभिन्न भारतीय भाषाओं के सर्जनात्मक एवं आलोचनात्मक लेखन में भारत-भक्ति के भाव से जागरण का कार्य एकाग्र-चित्त से कर रही है |

अखिल भारतीय साहित्य परिषद् राष्ट्रीय पुनर्निर्माण के व्यापक लक्ष्य को लेकर साहित्य के क्षेत्र में भारतीय भाषाओं के सक्रिय साहित्यकारों, समालोचकों, चिन्तनशील विचारको एवं साहित्यिक सुरुचिसम्पन्न नागरिकों का एक राष्ट्रीय संगठन है |

अखिल भारतीय साहित्य परिषद् का कार्य राष्ट्रीय स्तर पर पंजीकृत अखिल भारतीय साहित्य परिषद् न्यास, नई दिल्ली के संरक्षण में चलता है| प्रांतीय स्तर पर स्वतंत्र रूप से पंजीयन का प्रावधान है | पंजीकृत प्रांतीय इकाइयाँ न्यास से सम्बद्धता रखती हैं | किसी स्थान विशेष पर पहले से साहित्य सेवा में संलग्न साहित्यिक संस्था, जो परिषद् की रीति-नीति से सहमत हो और विचार साम्य रखती हो, न्यास से सम्बद्ध हो सकती है |

 

स्थापना
अखिल भारतीय साहित्य परिषद् की स्थापना अश्विन शुल्क द्वादशी सम्वत २०३३ विक्रमी, तदनुसार २७ अक्तूबर, १९६६ को दिल्ली में हुई और उसी वर्ष इसका राष्ट्रीय अधिवेशन प्रसिद्ध साहित्यकार जैनेन्द्र जी की अध्यक्षता में संपन्न हुआ |


यह संगठन आज देश के जम्मू कश्मीर, हिमाचल, पंजाब, हरियाणा, दिल्ली, राजस्थान, गुजरात, महाराष्ट, कर्नाटक, केरल, तमिलनाडु, आंध्रप्रदेश, उडीसा, उत्तर प्रदेश, छत्तीसगढ़, मध्य प्रदेश, बिहार, बंगाल, असम और अरुणाचल प्रदेश प्रान्तों ने भारत-भक्ति के भाव जागरण करते हुए आत्मचेतन भारत के निर्माण के द्वारा साहित्य-रचना और आलोचना के क्षेत्र में वैचारीक की स्थापना के अपने संकल्प को आप सब के सक्रिय सहयोग से साकार करने में सफल हुआ |

उद्देश्य

  1. भारतीय साहित्य और भारतीय भाषाओ की उन्नति |

  2. भारतीय साहित्य एवं भाषाओं के अनुसंधान कार्य को प्रोत्साहन तथा तत्संबंधी अनुसंधान केंद्र की स्थापना |

  3. भारतीय भाषाओं में परस्पर आदान -प्रदान और सहयोग को बढ़ावा देना |

  4. भारतीय जीवन - मूल्यों में आस्था रखने वाले साहित्यकारों को प्रोत्साहित करना तथा ऐसे साहित्य के प्रकाशन और प्रसारण में सहयोग करना |

  5. जनमानस में भारतीय साहित्य के प्रति आस्था तथा अभिरुचि उत्पन्न करना |

  6. साहित्य सामाजिक परिवर्तन का वाहक बन कर राष्ट्र की प्रगति में प्रभावी भूमिका निभा सके , इसके लिए प्रयास करना |

  7. इन उद्देश्यों की पूर्ति हेतु कार्य समिति द्वारा निर्णीत अन्य कार्य |

संगठन
अखिल भारतीय परिषद् न्यास पंजीकृत संस्था है | प्रांतीय एवं स्थानीय स्तर पर अखिल भारतीय साहित्य परिषद् के नाम से पंजीकृत इकाईयाँ सक्रिय है | यदि किसी स्थान पर राष्ट्रीय विचारो से आबद्ध कोई संस्था पहले से कार्यरत है तो वह अखिल भारतीय परिषद् से सम्बद्धता प्राप्त कर, उसी नाम से कार्य करती रह सकती है | 
अखिल भारतीय साहित्य परिषद्, अखिल भारतीय साहित्य परिषद् न्यास के अंतर्गत कार्य करती है | भारतीय भाषाओं की कोई भी समविचारी साहित्यिक संस्था परिषद् से सम्बद्ध हो सकती है |

कार्यक्षेत्र
अखिल भारतीय साहित्य परिषद् का कार्यक्षेत्र सम्पूर्ण देश है व यह सभी भारतीय भाषाओं के लिए कार्य करती है |

साहित्य परिषद् में संगठन मंत्री और सह संगठन मंत्री और सह संगठन मंत्री के रूप में दो पूर्णकालिक कार्यकर्त्ता परिषद् के कार्य की अखिल भारतीय स्तर पर संभाल करते रहे है |

संगठन की वर्तमान स्थिति
'अखिल भारतीय साहित्य परिषद् न्यास' के साहित्यिक-अनुष्ठान के रूप में परिषद् देश के विभिन्न प्रान्तों में सक्रिय है | प्रान्तों से प्राप्त वृत्त के अनुसार इस समय देश के ३० प्रान्तों में ६९५ इकाइयां कार्यरत है तथा १७३ स्थानों पर अपना सम्पर्क है | इसके अतिरिक्त मध्य भारत हिन्दी साहित्य सभा, ग्वालियर, जातीय साहित्य परिषद्, आंध्र प्रदेश एवं अखिल भारतीय नवोदित साहित्यकार परिषद् , उत्तर प्रदेश सहित अन्य कई प्रान्तों की स्थानीय साहित्यिक संस्थाएं भी परिषद् से सम्बद्ध है |

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